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27 Feb 2010

चन्द्रशेखर आज़ाद के शहादत दिवस से भगतसिंह के शहादत दिवस तक 'क्रान्तिकारी जागृति अभियान'


नौजवान भारत सभा, बिगुल मज़दूर दस्ता, स्त्री मज़दूर संगठन और जागरूक नागरिक मंच क्रान्तिकारी शहीदों के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए कल से एक माह का क्रान्तिकारी जागृति अभियान चलाएंगे। चन्द्रशेखर आज़ाद के शहादत दिवस 27 फरवरी से भगतसिंह के शहादत दिवस 23 मार्च तक चलने वाले इस अभियान का मकसद देशी-विदेशी पूंजी की लूट और शोषण के विरुद्ध संघर्ष के लिए मेहनतकश जनता को जगाना है।

भगतसिंह की बहादुरी और कुर्बानी के बारे में तो पूरा देश जानता है, लेकिन उनके विचारों को 1947 के बाद से लगातार दबाया जाता रहा है। भगतसिंह और उनके साथियों के लिए आज़ादी की लड़ाई का मतलब था, मज़दूर क्रान्ति के द्वारा मेहनतकश राज की स्थापना जिसमें उत्पादन, राजकाज और समाज के ढाँचे पर आम मेहनतकश जनता का नियंत्रण हो।

इस अभियान के दौरान दिल्ली के रोहिणी, बादली, नरेला, बवाना, शाहाबाद डेयरी, आदि इलाकों में नुक्कड़ सभाओं, साइकिल रैली, प्रभात फेरी, नाटकों, गीतों, चित्र प्रदर्शनी, घर-घर जनसंपर्क तथा पर्चा वितरण के द्वारा भगतसिंह का यह संदेश लोगों के बीच ले जाया जाएगा कि सच्ची आज़ादी के लिए नौजवानों को मज़दूरों-किसानों को जागरूक और संगठित करने की कठिन राह पर चलना होगा। भगतसिंह के इस विचार का प्रचार-प्रसार किया जाएगा कि मुट्ठीभर लोग हथियार उठाकर देश की तकदीर नहीं बदल सकते।

अभियान की शुरुआत 27 फरवरी की शाम राजा विहार, बादली में जनसभा और सांस्कृतिक कार्यक्रम से होगी। भगतसिंह, सुखदेव और राजगुरु को फांसी दिए जाने की 80वीं बरसी पर 21 से 23 मार्च तक रोहिणी, बादली और शाहाबाद के इलाकों में सघन कार्यक्रमों तथा मशाल जुलूस के साथ अभियान का समापन होगा। इसी दौरान अंतरराष्ट्रीय स्त्री दिवस के अवसर पर 7 मार्च (रविवार) को राजा विहार में कामगार स्त्रियों की रैली तथा सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन भी किया जाएगा। 14 मार्च को शाहाबाद डेयरी के इलाके में मज़दूरों की विशाल सभा तथा रैली की जाएगी और 15 से 19 मार्च तक नरेला, शाहपुर गढ़ी एवं भोरगढ़ इलाकों में साइकिल रैलियां, नुक्कड़ सभाएं और घर-घर जनसंपर्क अभियान चलाया जाएगा। 

28 Jun 2007

भगतसिंह ने कहा...

नौजवान भारत सभा, लाहौर का घोषणापत्र (एक अंश)





युवकों के सामने जो काम है, वह काफी कठिन है और उनके साधन बहुत थोड़े हैं। उनके मार्ग में बहुत सी बाधाएं भी आ सकती हैं। लेकिन थोड़े किन्‍तु निष्‍ठावान व्‍यक्तियों की लगन उन पर विजय पा सकती है। युवकों को आगे जाना चाहिए। उनके सामने जो कठिन एवं बाधाओं से भरा हुआ मार्ग है, और उन्‍हें जो महान कार्य सम्‍पन्‍न करना है, उसे समझना होगा। उन्‍हें अपने दिल में यह बात रख लेनी चाहिए कि ''सफलता मात्र एक संयोग है, जबकि बलिदान एक नियम है।'' उनके जीवन अनवरत असफलताओं के जीवन हो सते हैं ' गुरू गोविन्‍दसिंह को आजीवन जिन नारकीय परिस्थितियों का सामना करना पड़ा, हो सकता उससे भी अधिक नारकीय परिस्थितियों का सामना करना पड़े। फिर भी उन्‍हें यह कहकर कि अरे, यह सब तो भ्रम था, पश्चाताप नहीं करना होगा।




नौजवान दोस्‍तो, इतनी बड़ी लड़ाई में अपने आपको अकेला पाकर हताश मत होना। अपनी शक्ति को पहचानो। अपने ऊपर भरोसा करो। सफलता आपकी है।