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1 Jul 2007

भगतसिंह ने कहा...

नौजवान भारत सभा, लाहौर का घोषणापत्र






इतालवी पुनरुत्थान के प्रसिद्ध विद्वान मैजिनी ने एक बार कहा था, ''सभी महान राष्ट्रीय आन्दोलनों का शुभारम्भ जनता के अविख्यात या अनजाने, गैरप्रभावशाली व्यक्तियों से होता है, जिनके पास समय और बाधाओं की परवाह न करने वाला विश्वास तथा इच्छा-शक्ति के अलावा और कुछ नहीं होता।'' जीवन की नौका को लंगर उठाने दो। उसे सागर की लहरों पर तैरने दो और फिर -




लंगर ठहरे हुए छिछले पानी में पड़ता है।


विस्‍‍तृत और आश्चर्यजनक सागर पर विश्वास करो जहां ज्वार हर समय ताजा रहता है


और शक्तिशाली धाराएं स्वतंत्र होती हैं -


वहां अनायास, ऐ नौजवान कोलम्बस


सत्य का तुम्हारा नया विश्‍व हो सकता है।


22 Mar 2007

क्रान्तिकारी नवजागरण के तीन वर्ष

एक बार फिर
महान शहीदों की स्‍मृतियों और विरासत से
संजोना है संकल्‍प और विवेक का ईंधन
और प्रज्‍जवलित करनी है
नये संघर्षों की आग,
भविष्‍य-स्‍वप्‍नों से ढालनी हैं इस्‍पाती मुक्ति-परियोजनाएं।
उठो, देश के युवा शिल्पियों,
चलो जनजीवन की कार्यशाला में
गढ़ने के लिए स्‍वस्‍थ-सकर्मक जीवन-ऊष्‍मा से स्‍पन्दित यथार्थ।
पूंजी की रक्‍त-पिपासु सत्‍ता के विरुद्ध
निर्णायक न्‍याय-युद्ध के सेनानियों,
चलो प्रतीक्षारत जनता के बीच
प्रबल चक्रवाती झंझा को आमंत्रण देते हुए।

साथियो,
एक जिन्‍दा कौम की युवा पीढ़ी गुजरे हुए अतीत को वापस लाने का ख्‍वाब नहीं देखती, बल्कि वह अतीत से सबक लेती है, अपने पूर्वज क्रान्तिकारियों और शहीदों की स्‍मृति से प्रेरणा और विचारों से दिशा लेती है तथा कठिनतम चुनौतियों से जूझती हुई भविष्‍य-निर्माण के महासमर में सन्‍नद्ध हो जाती है।
वर्ष 2005-2006 भगतसिंह, राजगुरू, सुखदेव, चंद्रशेखर आजा, यतीन्‍द्रनाथ दास की शहादत का पचहत्‍तरवां वर्ष था। यही वर्षचंद्रशेखर आजाद का जन्‍मशताब्‍दी वर्ष भी था। सितम्‍बर 2008 को भगतसिंह के जन्‍मशताब्‍दी वर्ष का भी समापन हो। चटगांव विद्रोह के 75 वर्ष, नौसेना विद्रोह के 60 वर्षऔर 1857 के प्रथम स्‍वाधीनता संग्राम के 150 वर्ष भी इसी दौरान पूरे होंगे।यह अवसर इस देश के नौजवानों के लिए अपनी ऐतिहासिक जिम्‍मेदारी की याददिहानी का अवसर है। यह ‘नयी प्रेरणा, नये संकल्‍प, नयी शुरुआत’ का अवसर है। इसीलिए23 मार्च 2005 से लेकर 28 सितम्‍बर 2008 के बीच के इन तीन वर्षों को, एक नई क्रान्ति का सन्‍देश जन-जन तक पहुंचाने वाली स्‍मृति संकल्‍प यात्राओं के माध्‍यम से क्रान्तिकारी नवजागरण के तीन ऐतिहासिक वर्ष बना देने के लिए हम कृ‍तसंकल्‍प हैं।
भगतसिंह की वीरता और कुर्बानी से तो पूरदेश परिचित है लेकिन इस देश के पढ़-लिखे नौजवान तक यह नहीं जानते कि 23 वर्ष की छोटी सी उम्र में फांसी का फन्‍दा चूमने वाला वह जांबाज नौजवान कितना ओजस्‍वी, प्रखर और दूरदर्शी विचारक था! यह हमारी जनता का दुर्भाग्‍य है और सत्‍ताधारियों की साजिश का नतीजा है। अब यह हमारा काम है कि हम भगतसिंह और उनके साथियों के विचारों को जन-जन तक पहुंचाएं, उनकी समृति से प्रेरणां लें और उनके विचारों के आलोक में अपने देशकाल की परिस्थितियों को समझकर नई क्रान्ति की दिशा तय करें और फिर उस राह पर दृढ़तापूर्वक बढ़ें।
भगतसिंह और उनके साथियों ने अपने लेखों, बयानों और पर्चों में साफ शब्‍दों में और बार-बार यह कहा था कि उनका लक्ष्‍य केवल व्रिटिश साम्राज्‍यवादियों की औपनिवेशिक गुलामी का खात्‍मा ही नहीं है, बल्कि उनकी लड़ाई साम्राज्‍यवाद और देशी पूंजीवाद के विरुद्ध लम्‍बे ऐतिहासिक संघर्ष की एक कड़ी है।उन्‍होंने स्‍पष्‍ट किया था कि क्रान्तिकारी थैलीशाहों के लिए नहीं, बल्कि 90 फीसदी आम मेहनतकश जनता के लिए आज़ादी और जनतंत्र हासिल करना चाहते हैं और साम्राज्‍यवाद- सामन्‍तवाद के खात्‍मे के बाद पूंजीवाद को भी नष्‍ट करके एक ऐसी समाजवादीव्‍यवस्‍थाकायम करना चाहते हैं जिसमें उत्‍पादन, राज-काज और समाज के ढांचे पर आम मेहनतकश जनता काबिज हो।
क्रान्तिकारियों का यह सपना साकार नहीं हो सका। एक अधूरी, खण्डित आज़ादी के बाद, साम्राज्‍यवाद से सांठगांठ किए हुए देशी पूंजीवाद के ज़ालिम शासन के जुवे को ढोते-ढोते आधी सदी से अधिक समय बीत चुका है। आजादी और जनतंत्र के सारे छल-छद् म उजागर हो चुके हैं। मुट्ठीभर मुफ़्तखोरों की जिन्‍दगी में चमकते उजाले के बरक्‍स आम लोगों की जिन्‍दगी का अंधेरा गहराता चला गया है। सभी चुनावबाज़ पूंजीवादी पार्टियों के साथ ही अपने लक्ष्‍य से विश्‍वासघात कर चुकी नकली वामपंथी पार्टियों का गंदा चेहरा भी नंगा हो चुका है। अब रास्‍ता सिर्फ एक है। विकल्‍प सिर्फ एक है। हमें भगतसिंह के दिखाए रास्‍ते पर आगे बढ़ने का संकल्‍प लेना ही होगा। इसीलिए हम भारत के नौजवानों का आह्वान करते है: ‘’भगतसिंह की बात सुनो। नई क्रान्ति की राह चलो।’’
भगतसिंह के विचार क्षितिज पर अनवरत जलती मशाल की तरह हमें दिशा दिखला रहे हैं। अब गांव-गांव और शहर-शहर में और तमाम कालेजों-विश्‍वविद्यालयों में नौजवानों और छात्रों को नए सिरे से अपने क्रान्तिकारी संगठन बनाने होंगे। उन्‍हें चुनावबाज़ मदारियों का पिछलग्‍गू बनने से बचना होगा। इसके बाद, जैसा कि जेल की कालकोठरी से युवाओं को भेजे गए अपने संदेश में भगतसिंह ने कहा था, छात्रों-नौजवानों को कारखानों के मज़दूरों और गांव की झोपडि़यों तक जाना होगा और तमाम मेहनतकशों को संगठित करना होगा। यही संदेश लेकर हम इस देश के हर जीवित युवा हृदय तक पहुंचना चाहते हैं।
साथियो! बैठे-बैठे सोचते रहने से तो हर राह मुश्किल लगती है। राह की कठिनाइयों को। यात्रा शरू करने के बाद ही दूर किया जा सकता है। भगतसिंह और उनके साथियों का सपना एक जलता हुआ प्रश्‍न बनकर हमारी आंखों में झांक रहा है। उनकी विरासत हमें ललकार रही है और भविष्‍य हमें आवाज़ दे रहा है। एक ज़िन्‍दा क़ौम के नौजवान इसकी अनसुनी नहीं कर सकते। हम एक नई क्रान्ति की तैयारी के लिए, एक नए क्रान्तिकारी नवजागरण का सन्‍देश पूरे देश में फैला देने के लिए आपका आह्वान करते हैं।
क्रान्तिकारी अभिवादन सहित,
-नौजवान भारत सभा
-दिशा छात्र संगठन

समृति संकल्‍प यात्रा के इन तीन वर्षों के दौरान
-क्रान्तिकारी छात्रों-नौजवानों की यात्रा टोलियां गांव-गांव और शहर-शहर का दौरा करते हुए देश के अधिकतम हिस्‍से तक पहुंचने की कोशिश करेंगी, छात्रों-युवाओं और आम लोगों तक नई क्रान्ति का सन्‍देश पहुंचाएंगी और एकजुट होकर देशव्‍यापी, नए क्रान्तिकारी छात्र संगठन और नौजवान संगठन बनाने के लिए उनका आह्वान करेंगी।
- ये यात्रा टोलियां सभी चुनावबाज़ पूंजीवादी और नकली वामपंथी पार्टियों तथा ट्रेडयूनियनों के धन्‍धेबाज़ों से छुटकारा पाकर नये क्रान्तिकारी जनसंघर्ष के लिए एकजुट और संगठित होने के लिए आम मेहनतकश जनता का आह्वान करेंगी।
- गांव-शहरों और कालेजों-विश्‍वविद्यालयों में नौजवानों और छात्रों के क्रान्तिकारी संगठन बनाने का काम भी साथ-साथ चलता रहेगा।
- हमसफ़र बनने वाले नौजवानों को साथ लेकर ज्‍़यादा से ज्‍़यादा नई यात्रा टोलियां बनायी जाएंगी।
- यात्रा टोलियों के साथ ही सचल सांस्‍कृतिक दस्‍ते भी देश के विभिन्‍न हिस्‍सों का दौरा करेंगे।
इस मुहिम के समर्थक नागरिकों के सहयोग से यात्रा टोलियों के आवश्‍यक व्‍यय के अतिरिक्‍त बड़े पैमाने पर विभिन्‍न भारतीय भाषाओं में भगतसिंह और उनके साथियों के दस्‍तावेज़ों का प्रकाशन और वितरण किया जाएगा। इसके साथ ही क्रान्तिकारी विचारों, क्रान्तिकारी इतिहास और देश की वर्तमान दुरवस्‍था के कारणों से परिचित कराने वाला साहित्‍य भी प्रकाशित और वितरित किया जायेगा। इस काम में राहुल फ़ाउण्‍डेशन, परिपकल्‍पना प्रकाशन, शहीद भगतसिंह यादगारी प्रकाशन और दस्‍तक प्रकाशन हमारे सहयोगी होंगे।
- इस विशेष अवसर पर स्‍मृति चिह्नों के रूप में पोस्‍टर, कैलेण्‍डर, चित्र-कार्डों के सेट, डायरी आदि भी प्रकाशित किए जाएंगे।
- शिक्षा संस्‍थानों और बौद्धिक सांस्‍कृतिक केन्‍द्रों में विचार गोष्ठियों का आयोजन किया जायेगा।
- स्‍मृति संकल्‍प यात्रा की लक्ष्‍यपूर्ति की दृष्टि से उपयोगी सुझावों के आधार पर अन्‍य कार्यक्रम भी लिये जा सकते हैं।

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सम्‍पर्क:
* बी-100, मुकुन्‍द विहार, करावल नगर, दिल्‍ली-110094, फोन: 011-65976788
* रूम न.-3, ए-67, क्रिश्चियन कालोनी, पटेल चेस्‍ट के निकट, दिल्‍ली विश्‍वविद्यालय, दिल्‍ली, फोन: 9213243755/ 9911055517
* डी-68, निरालानगर, लखनऊ-226020, फोन:0522-2786782
* 16/6, वाद्यम्‍बरी हाउसिंग स्‍कीम, अल्‍लापुर, इलाहाबाद, 09415646383
* संस्‍कृति कुटीर, कल्‍याणपुर, गोरखपुर, फोन: 0551-2241922
* नोएडा, फोन: 09211273360
* गाजियाबाद, फोन: 09891993332
* लुधियाना, फोन: 09463339621
* डा. दूधनाथ, जनगण होम्‍यो सेवासदन, मर्यादपुर
ई मेल: smriti_sankalp@yahoo.com, smriti.sankalp@gmail.com